बुधवार, 18 दिसंबर 2019

विश्व रिकार्ड बना रहा अग्निशिखा का प्रथम अंतर्राष्ट्रीय साहित्य महोत्सव


२२/२५ दिसम्बर २०१९ को अग्निशिखा का प्रथम अंतर्राष्ट्रीय साहित्य महोत्सव
जुट रहे देश विदेश के साहित्यकार 
मुंबई, २४/२५ दिसम्बर २०१९ को मुंबई के सीपी. टैंक में होने जा रहे अग्निशिखा अंतर्राष्ट्रीय  साहित्य महोत्सव कई मायनों में विश्व रिकार्ड बनाने जा रहा है. अलका पाण्डेय के संयोजन में आयोजित यह साहित्यिक आयोजन कई मामलों में अनूठा है. जैसे कि पहली बार इतने बड़े पैमाने पर मुंबई में किसी एक निजी संस्था द्वारा इतना बड़ा साहित्यिक आयोजन का होना जिसमे भारत के २२ राज्यों एवं ४ देशों के साहित्यकार सहभागी होंगे.२०० से अधिक साहित्यकार कविता सहित गद्य रचनाओं का पाठ करेंगे साथ ही उन रचनाओं को पुस्तक रूप में उसी समारोह में लोकार्पण भी होगा साथ ही २०० से अधिक साहित्यकारों का एक ही मंच पर सम्मान भी होगा. जो कि मुंबई में पहली बार होगा. इसके साथ

ही १० अलग- अलग सत्रों में साहित्य और सामाज के विभिन्न विषयों पर विमर्श एवं परिचर्चा भी होगी. मुंबई सहित देश भर में इस आयोजन की चर्चा हो रही है और लोग समाज सेविका एवं लेखिका अलका पाण्डेय के साहस और कर्मण्यता की प्रशंसा कर रहे हैं.  

1 टिप्पणी:

  1. प्रिय अलका जी,
    आपको अनेकों अनेक बधाइयां, पहली तो विद्यावाचस्पति से अलंकृत होने पर, दूसरी यह विश्व स्तरीय या संभवतः विश्व में अपनी तरह का सबसे बड़ा आयोजन करने पर, तीसरा कदाचित इतनी बड़ी संख्या में भारत से और भारत के बाहर के कवियों/ साहित्यकारों का इतना बड़ा भव्य आयोजन करने पर, चौथा इतनी बड़ी संख्या में साहित्यकारों के संयुक्त प्रकाशन पर और न जाने कितनी बातें मन में आ रही है उन्हें छोड़ देने पर भी मेरी ओर से हार्दिक बधाई।
    मैं इस समय बड़े बेटे के पास सिंगापुर में होने के कारण जनवरी के प्रथम सप्ताह से पहले लौट नहीं सकूंगा और इस कारण इस साहित्य महोत्सव में भाग नहीं ले सकूंगा। इतनी बड़ी संख्या में देश के विभिन्न हिस्सों से आए हुए साहित्यकारों से मिलना उन से चर्चाएं करना, यह सब बड़े सौभाग्य से मिलता है। कई बार लगता है कि यदि यह संभव हो पाता तो कितने ही कवियों लेखकों और रचनाकारों से परिचय का सौभाग्य प्राप्त होता। किंतु जब कोई कसक मन में रह जाती है और उसके लिए व्यक्ति हृदय से प्रयास करें तो अवश्य ही कोई ना कोई राह भी जरूर बनती है। इस बात पर मेरा अटल विश्वास है। इसलिए मैं आशा करता हूं ऐसे ही किसी और कार्यक्रम में हम फिर मिलेंगे। इस वर्ष के प्रायः अंतिम सप्ताह में होने वाला यह कार्यक्रम निश्चित रूप से अविस्मरणीय होने वाला है, मैं इस बारे में पूर्ण रूप से आश्वस्त हूं। कृपया संपूर्ण भारतवर्ष के साथ-साथ 4 अन्य देशों से पधारे सभी रचनाकारों को मेरी ओर से धन्यवाद और मेरा अविरल स्नेह कहें। यहां से लौटने के बाद संभवत: कुछ और साथियों के साथ मैं जनवरी में मुंबई लौटने पर आपसे मिलूंगा।
    एक बार पुनः आपको बधाई और कार्यक्रम की सफलता हेतु आपको और सभी प्रतिभागियों को मेरी ओर से हार्दिक शुभकामनाएं।
    -- राम प्रकाश विश्वकर्मा (कानपुर),
    सेवानिवृत्त संयुक्त निदेशक (राजभाषा),
    भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र मुंबई

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