सोमवार, 10 फ़रवरी 2020

अग्निशिखा का आदिवासी बच्चों में चित्रकला प्रतियोगिता एवं अन्न वस्त्र वितरण

आदिवासियों के बीच आनन्द एवं वस्त्र दान करते हुए अलका पाण्डेय जी एवं उनके पौत्र



संस्था अध्यक्ष अलका पाण्डेय जी आदिवासियों को सहयोगियों के साथ अन्न व वस्त्र दान करते हुए 

नवी मुम्बई, सामाजिक एवं साहित्यिक संस्था अखिल भारतीय अग्निशिखा मंच द्वारा 9 मार्च 2020 को पाल घर जनपद के कंचाड तालुक़ा में आदिवासी बच्चों के बीच चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित की गई। जिसमें विजेताओं सहित प्रतिभागी बच्चों को भी प्रोत्साहन स्वरूप ज्योमेट्री बॉक्स एवं चॉकलेट एवं बिस्किट बांटे गये। कुछ बच्चों को वस्त्र भी प्रदान किये गए। साथ ही आसपास के गरीब आदिवासी परिवारों को अन्नदान के साथ  वस्त्र दान किये गए।  पहले सत्र में हुई आदिवासी बच्चों की चित्रकला प्रतियोगिता में ६० बच्चों ने भाग लिया था। सभी प्रतिभागी बच्चों को चित्रकारी करने वाली किताब,कलर स्केच पेन दिए गए थे। संस्था अध्यक्ष अलका पाण्डेय के नेतृत्व में रजनी कलोसे जी ने यह काम बहुत मन लगा कर किया।
दूसरे सत्र में बुजुर्ग आदिवासी महिलाओं व पुरुषों को 
कम्बल , साड़ियाँ , आटा , चावल ,तेल , दाल , पोहे , खिचड़ी , नमक , शक्कर , चाय पत्ती , पापड़ , अचार , नमक तथा बड़ों को व बच्चों को मैगी ,बिस्कुट , चाकलेट का वितरण किया 
सभी गाँव के लोगों ने अग्निशिखा मंच को बहुत बहुत आशीष ।दिया 
तीसरे सत्र में काव्य पाठ हुआ। काव्य पाठ का संचालन त्रिलोचन सिंह अरोड़ा ने किया
कवि पवन तिवारी जी ने गजल , कविता सुना कर बहुत तालियाँ बटोरी। सभी गाँव वाले कविता का आन्नद ले रहे थे । अलका पाण्डेय , हेमलता मानवी , नीरजा ठाकुर ,वनिता राजे जी , रजनी कोलसे, प्रज्वल  वागदरी, जी ने, कविता सुनाई।अलका पाण्डेय ने आभार व्यक्त करते हुए  कहा कि मेरी प्रेरणा स्तोत्र आदरणीय अनईता मेहरा जी हैं।जो इस कार्य में हमेशा सहयोग करती हैं। अभिनेत्री ख़ुशबू कमल, राज मिर्ज़ापुरी , पदमा तिवारी , रजनी कलोसे, हेमलता मानवी, नीरजा ठाकुर न वनिता राजे, राजेश अग्रवाल , राम मनोहर वर्मा सबका में हृदय से धन्यवाद करती हूँ ।
जिन्होंने इस कार्य में मुझे सहयोग किया । कुछ आ नहीं पाये कुछ साथ आकर सहयोग किये। सबका आभार प्रकट करती हूँ  व आशा करती हूँ भविष्य में वो मुझे इसी तरह  सहयोग करते रहेंगे।

गुरुवार, 26 दिसंबर 2019

अग्निशिखा का अंतर्राष्ट्रीय साहित्य महोत्सव २०१९ का शानदार आयोजन



२२ राज्यों के साहित्यकारों ने की शिरकत


 
मुंबई, सीपी टैंक के पांजरापोल स्थित पंचायती फतेहपुरिया वाड़ी में २४/२५ दिसम्बर २०१९ को दो दिन तक प्रथम अग्निशिखा अंतराष्ट्रीय साहित्य महोत्सव मुंबई, में  देश विदेश से आये साहित्यकारों ने अलग-अलग विषयों चर्चा परिचर्चा की। इस अवसर कई पुस्तकों का विमोचन हुआ साथ ही मुंबई के प्रमुख हिन्दी प्रकाशक आर.के पब्लिकेशन की और से पुस्तक प्रदर्शनी भी लगी. उदघाटन सत्र को लेकर कुल दस सत्र थे। जिनमें हिंदी का वैश्विक परिदृश्य एवं चुनौतियाँ, हिंदी साहित्य में मराठी भाषियों का योगदान एवं मंचीय साहित्य एवं पाठ्यक्रम साहित्य की दूरियाँ और उनके कारण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा देश के विभिन्न अंचलों से आये विद्वानों ने की । इस अवसर पर भव्य कवि सम्मेलन एवं साहित्यकारों का सम्मान किया गया ।  24 दिसम्बर को आरम्भ हुये इस साहित्यिक महाकुंभ का आरम्भ दीप प्रज्वलन के साथ महाराष्ट्र राज्य साहित्य अकादमी के कार्याध्यक्ष शीतला प्रसाद दुबे ने किया। सूत्र संचालन युवा साहित्यकार पवन तिवारी ने किया। ज्ञात हो कि अखिल भारतीय अग्निशिखा मंच की अध्यक्ष अलका पाण्डेय के संयोजन में आयोजित यह साहित्यिक आयोजन कई मामलों में अनूठा रहा जैसे कि पहली बार इतने बड़े पैमाने पर मुंबई में किसी एक निजी संस्था द्वारा इतना बड़ा साहित्यिक आयोजन सम्पन्न हुआ. जिसमें भारत के २२ राज्यों एवं ४ देशों के विभिन्न भाषा भाषी साहित्यकार सहभागी हुए. २०० से अधिक साहित्यकार कविता सहित गद्य रचनाओं का पाठ किये, साथ ही उन रचनाओं को पुस्तक रूप में उसी समारोह में लोकार्पण भी हुआ। जो कि मुंबई में पहली बार हुआ. कार्यक्रम का शुभारंभ रायपुर से पधारी आकाशवाणी में उद्घोषिका शुभ्रा ठाकुर द्वारा माँ शारदा की वंदना से हुआ। इसके बाद कार्यक्रम की आयोजक एवं संयोजक समाज सेविका एवं लेखिका अलका पाण्डेय ने स्वागत भाषण दिया। उसके बाद कुमार जैन ने विषय प्रवर्तन का दायित्व निभाया। उसके बाद अतिथियों का तुलसी के वृक्ष, पट, श्रीफल एवं संस्था का स्मृति चिन्ह प्रदान कर स्वागत किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में आमन्त्रित महाराष्ट्र राज्य अकादमी के अध्यक्ष शीतला प्रसाद दुबे ने  कहा कि अर्थ की इस नगरी में साहित्यिक कुंभ का इतना बड़ा एवं महत्वपूर्ण आयोजन करना उसमें देश-विदेश के साहित्यकारों एक मंच पर लाना महत्वपूर्ण एवं साहस का काम है। इसके लिए मैं अलका पांडेय को साधुवाद देता हूँ।
समारोह का प्रथम सत्र पुस्तकों के नाम रहा,  इस सत्र में देश के अनेक अंचलों से आये साहित्यकारों की पुस्तकों का विमोचन हुआ. जिसमें मुंबई की लेखिका रश्मि नायर की पुस्तक ‘सेज के फूल’, ठाणे से आये वरिष्ठ कवि अरुण प्रकाश अनुरागी की पुस्तक ‘सृष्टि एक महाकाव्य’, नवी मुंबई से  अलका पांडेय की लघु आकाश, मध्य प्रदेश के इंदौर से पधारी डॉ. अंशुल कंसल ‘कनुप्रिया’ की पुस्तक शतक कथा ( मराठी अनुवाद ) और छत्तीसगढ़ के रायपुर  से पधारी वरिष्ठ कवयित्री अनिता झा की पुस्तक ‘रंगीन नानी की फुलझड़ियाँ’ एवं महोत्सव में आये रचनाकारों की रचनाओं का साझा संकलन अग्निशिखा काव्य धारा (पद्य) एवं कथा धारा (गद्य) का विमोचन हुआ। इस अववसर पर रचनाकारों ने अपनी पुस्तक पर अपना मंतव्य रखा।         
  अगला सत्र हिंदी का वैश्विक स्वरूप एवं उसकी चुनौतियाँ विषय पर मुख्य वक्ता युवा साहित्यकार एवं चिंतक पवन तिवारी ने इजराइल के प्रधान मंत्री डेविड बेन गुरियन और आधुनिक तुर्की के निर्माता मुस्तफा कमाल पाशा से भाषा के संदर्भ में प्रेरणा लेने की बात विस्तार से बताई, वहीं विशेष अतिथि रहे कानपुर से पधारे वरिष्ठ साहित्यकार श्रीहरि वाणी ने हिंदी को स्व के जीवन मे उतारने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हिंदी के खाने वाले अपने बच्चों को अंग्रेजी के माध्यम से पढ़ाते हैं। ऐसी प्रवत्तियों के कारण को जानकर उसको दूर करने का गम्भीर प्रयास करना होगा। सत्र की अध्यक्षता कर रहे रमेश यादव ने कहा कि इसे आंदोलन बनाना होगा, पहले छोटे-छोटे प्रयास करने होंगे। इस सत्र का संचालन प्रसिद्ध मंच संचालक कुमार जैन ने किया। दोपहर के भोजन के बाद एक बार फिर सारे साहित्यकार सभागृह में एकत्रित हुए ।विषय था, लघुकथा पर विचार विमर्श, मार्गदर्शन एवं लघुकथा वाचन। इस सत्र की अध्यक्षता कानपुर से पधारे वरिष्ठ साहित्यकार श्रीहरि वाणी ने की। मुख्य अतिथि रहे वरिष्ठ कहानीकार पुरुषोत्तम दुबे, मुख्य वक्ता थे वरिष्ठ लघु कथाकार सेवासदन प्रसाद, विशेष अतिथि थे छत्तीसगढ़ से आये वरिष्ठ लघु कथाकार महेश राजा,. युक्ता झा, वरिष्ठ लघु कथाकार आभा झा एवं जलगांव से पधारी प्रियंका सोनी। इस अवसर पर अनेक लघुकथाकारों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया।इस सत्र का गरिमापूर्ण संचालन नागपुर से पधारी कवयित्री हेमलता ‘मानवी’ ने किया।
 शाम का सत्र मराठी भाषियों का हिंदी साहित्य में योगदान एवं कवि सम्मेलन विषय पर मुख्य वक्ता साहित्यकार पवन तिवारी ने बाबूराव विष्णु पराड़कर से लेकर, अन्नत गोपाल शेवड़े के प्रयास से नागपुर में हुए प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन के आयोजन से लेकर, दामोदर खड़से, मुक्तिबोध, सूर्य नारायण रणसुभे, मालती जोशी, माधव राव सप्रे एवं प्रभाकर माचवे के हिंदी भाषा व साहित्य के योगदान पर विस्तार ने अपनी बात रखी। सत्र का सुंदर संचालन युवा कवि उमेश चव्हाण ने किया। इस सत्र में अनेक मराठी कवियों ने मराठी में सुंदर कविताएं सुनाई। अंतिम सत्र कवि सम्मेलन का रहा। जिसमें देश भर से आये रचनाकारों ने कविता एवं लघुकथा पाठ किया। जिनमें नीरजा ठाकुर जी, वंदना श्रीवास्तव जी, निरुपमा शर्मा जी, चंद्रिका व्यास जी, सेवा सदन जी, रामस्वरूप साहू जी, रघुवंशी जी, विश्वम्भर दयाल तिवारी जी, अजय कुलश्रेष्ठ जी, श्री हरिवाणी जी, जितेंद्र पांडेय जी,अशोक पवार जी, सुनीति पवार जी,छगन राव जी, ब्रजेन्द्र नारायण जी, हरिवंश प्रभात जी,अंजना कुमार जी, पवन नंदन जी, रश्मि नायर जी, रानी अग्रवाल जी, अनीता झा जी, शारदेन्दु झा जी, अरविंद श्रीवास्तव जी, प्रेमा नाडुविनामनी जी, सुधा जी, श्याम मठपाल जी, अर्चना सिन्हा जी, नीता झा जी, शुभ्रा ठाकुर जी, अंजुल कंसल जी, हेमलता मानवी जी, उमेश चव्हाण, रमेश सिंह जी, अन्नपूर्णा वाजपेयी जी, कुसुम सिंह जी, राम नयन दुबे जी, रमेश यादव जी, अजय बनारसी जी, विनीत शंकर जी भाई अश्विनी पांडेय जी, बनवारी जाजोदिया जी,निहालचंद शिवहरे जी, कृष्ण कुमार जी,संतोष गर्ग जी, अरोरा जी, अरुण प्रकाश अनुरागी जी, विनय शर्मा दीप जी,नीलम दीक्षित जी, नीलम गुप्ता जी,कविता काठाने रश्मि कुलश्रेष्ठ जी,सीमा निगम जी, डॉ. अजय रस्तोगी जी,दीपक सकपाल जी,अमित जी, रमेश कटारिया जी, चंदा गांगी जी, अमर बानिया जी,रविन्द्र जुगरान जी, पद्मा तिवारी जी, विजयी भरत दीक्षित जी, दीपक दीक्षित जी, राम कुमार जी, शिवम तिवारी जी,डॉ राजलक्ष्मी शिवहरे जी, संजय रावत जी, महेश राजा जी,राम कुमारी जी रामस्वरूप चंदेल जी, आदरणीय देवेंद्र पांडेय, रेखा रोशनी जी, संजय मालवी जी, चंदा डांगी जी, अशोक गुप्ता जी, विक्रम सिंह जी, संजीव ठाकुर जी, पुष्पांजलि अग्रवाल जी, वीरेंद्र यादव जी,दुर्गेश नंदिनी जी, प्रमिला शर्मा जी, महेश राजा,अनिल कुमार राही, शारदा प्रसाद दुबे, अधिवक्ता अनिल शर्मा,कीर्ति वल्लभ शक्टा,पल्लवी झा, कोशिका रावल,पंकज भूषण पाठक,शकुन्तला शेंडे,सत्यदेव तिवारी, धरणी सोलंकी, नवेंदु शेखर झा, ओजेंद्र तिवारी,पूर्णिमा विश्वकर्मा, शिवम तिवारी के नाम उल्लेखनीय हैं.  
दूसरे दिन के आयोजन में  प्रथम सत्र बेहद महत्वपूर्ण रहा । विषय था मंचीय साहित्य एवं पाठ्यक्रम साहित्य की दूरियां एवं  उसके कारण। इस सत्र की अध्यक्षता प्रसिद्ध शिक्षाविद और लर्नर्स अकादमी के अध्यक्ष राम नयन दुबे जी थे एवं मुख्य वक्ता थे, युवा समालोचक, कवि एवं सेंट पीटर्स संस्थान पंचगनी में हिंदी विभाग के अध्यक्ष जीतेन्द्र पांडेय। विशेष अतिथि थे, बनवारी लाल जिजोदिया एवं दतिया से पधारे वरिष्ठ साहित्यकार अरविंद श्रीवास्तव। संचालन कुमार जैन ने किया। लोगों ने इस सत्र को बड़े ध्यान से सुना डॉ जीतेन्द्र पांडेय ने मंचीय साहित्य के गिरते स्तर और पाठ्यक्रम के मध्य नैतिकता के मामले को बताया। वहीं राम नयन दुबे जी ने कहा कि पाठ्यक्रम में आने वाली रचनाएं देश समाज एवं छात्रों  के उज्ज्वल भविष्य को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं। जबकि मंचीय साहित्य सामने बैठे श्रोताओं के विशुद्ध मनोरंजन को ध्यान में रखकर रचा जाता है।  इसके बाद  का सत्र भारत के विविध लोक गीत कलाएं एवं उनका संवर्धन था। इस सत्र की अध्यक्षता डॉ सुनीति पवार ने की। मुख्य अतिथि थे डॉ. अशोक पवार, विशेष अतिथि थे कानपुर से पधारे वरिष्ठ साहित्यकार अजय कुलश्रेष्ठ, संचालन पवन तिवारी ने किया। इस दिन का अंतिम सत्र कवि सम्मेलन एवं सम्मान के नाम रहा। कार्यक्रम के आयोजन में विशेष रूप से सहयोग करने वाले देवेंद्र पांडेय, कुमार जैन, अश्विन पांडेय, नीरजा ठाकुर, राम स्वरूप साहू, श्रीहरि वाणी, अजय बनारसी, रामप्यारे रघुवंनशी, विनय शर्मा दीप, निरुपमा शर्मा, वंदना श्रीवास्तव, चंद्रिका व्यास, सेवा सदन प्रसाद , अरुण प्रकाश अनुरागी एवं पवन तिवारी जैसे साहित्यकारों सहित सभी सहभागी साहित्यकारों के प्रति धन्यवाद  ज्ञापित किया । आयोजन में देश विदेश से आये सभी साहित्यकारों ने एक स्वर में अखिल भारतीय अग्निशिखा मंच की अध्यक्ष एवं इस पूरे आयोजन की कर्ता धर्ता अलका पांडेय के साहस और कर्मण्यता की भूरि- भूरि प्रशंसा की ।

बुधवार, 18 दिसंबर 2019

विश्व रिकार्ड बना रहा अग्निशिखा का प्रथम अंतर्राष्ट्रीय साहित्य महोत्सव


२२/२५ दिसम्बर २०१९ को अग्निशिखा का प्रथम अंतर्राष्ट्रीय साहित्य महोत्सव
जुट रहे देश विदेश के साहित्यकार 
मुंबई, २४/२५ दिसम्बर २०१९ को मुंबई के सीपी. टैंक में होने जा रहे अग्निशिखा अंतर्राष्ट्रीय  साहित्य महोत्सव कई मायनों में विश्व रिकार्ड बनाने जा रहा है. अलका पाण्डेय के संयोजन में आयोजित यह साहित्यिक आयोजन कई मामलों में अनूठा है. जैसे कि पहली बार इतने बड़े पैमाने पर मुंबई में किसी एक निजी संस्था द्वारा इतना बड़ा साहित्यिक आयोजन का होना जिसमे भारत के २२ राज्यों एवं ४ देशों के साहित्यकार सहभागी होंगे.२०० से अधिक साहित्यकार कविता सहित गद्य रचनाओं का पाठ करेंगे साथ ही उन रचनाओं को पुस्तक रूप में उसी समारोह में लोकार्पण भी होगा साथ ही २०० से अधिक साहित्यकारों का एक ही मंच पर सम्मान भी होगा. जो कि मुंबई में पहली बार होगा. इसके साथ

ही १० अलग- अलग सत्रों में साहित्य और सामाज के विभिन्न विषयों पर विमर्श एवं परिचर्चा भी होगी. मुंबई सहित देश भर में इस आयोजन की चर्चा हो रही है और लोग समाज सेविका एवं लेखिका अलका पाण्डेय के साहस और कर्मण्यता की प्रशंसा कर रहे हैं.  

रविवार, 15 दिसंबर 2019

मुंबई में अग्निशिखा अंतर्राष्ट्रीय साहित्य महोत्सव २४ दिसम्बर २०१९ से


अग्निशिखा का अन्तर्राष्ट्रीय साहित्य महोत्सव २४/२५ दिसम्बर २०१९ को मुंबई में

मुंबई,अखिल भारतीय अग्निशिखा मंच की ओर से मुम्बई में पहली बार २४/२५ दिसम्बर को मारवाड़ी फतेहपुरिया पंचायती वाड़ी दूसरी पान्जरापोल लेन के सी पी टैंक मुंबई -४ स्थित  दो दिवसीय अग्निशिखा अंतर्राष्ट्रीय साहित्य महोत्सव मुम्बई का आयोजन संस्था अध्यक्ष श्रीमती अलका पाण्डेय के नेतृत्व में आयोजित होने जा रहा है. जिसमें देश विदेश से २०० से अधिक साहित्यकार एवं बुद्धिजीवी भाग लेंगे. इस दो दिवसीय साहित्यिक महाकुम्भ में १० अलग-अलग सत्रों में साहित्य,राजनीति,शिक्षा,लोकगीत कला एवं उसके सम्वर्धन से जुड़े विषयों पर परिचर्चा एवं विमर्श होगा. जिस पर देश विदेश से आये हुए साहित्यकार एवं बुद्धिजीवी अपने- अपने विचार रखेंगे एवं उन विचारों पर चर्चा होगी. दोनों दिन के सांध्यकालीन सत्र में भव्य कवि सम्मेलन होगा. संस्था की ओर से पंजीकृत साहित्यकारों एवं अतिथियों के लिए दो दिनों के आवास एवं भोजन की भी व्यवस्था की गयी है. समारोह का उद्घाटन वरिष्ठ साहित्यकार श्रीमती सुधा अरोड़ा के हाथों होगा.इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में महाराष्ट्र हिन्दी साहित्य अकादमी के कार्याध्यक्ष श्री शीतला प्रसाद दुबे भी उपस्थित रहेंगे. स्वागत भाषण संस्था की अध्यक्ष श्रीमती अलका पाण्डेय करेंगी. विषय प्रवर्तन वरिष्ठ शायर कुमार जैन करेंगे उद्घाटन सत्र का संचालन युवा साहित्यकार एवं प्रसिद्ध मंच संचालक पवन तिवारी करेंगें. प्रथम सत्र पुस्तक लोकार्पण का होगा. दूसरे सत्र में साहित्यकारों का सम्मान होगा. तीसरा सत्र विशेष रूप से उल्लेखनीय है क्योंकि उसमें राज भाषा हिंदी का वैश्विक स्वरुप एवं चुनौतियाँ विषय पर विद्वानों द्वारा चर्चा होगी. चौथा सत्र लघुकथाओं का होगा. पांचवा सत्र मराठी भाषियों का हिन्दी साहित्य में योगदान जैसे महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा होगी. दिन का आख़िरी सत्र कवि सम्मेलन का होगा. जिसमे देश विदेश से आये कवि अपनी रचनाओं का पाठ करेंगे. दूसरे दिन अर्थात २५ दिसम्बर २०१९ को सुबह का पहला सत्र योग का होगा. दूसरा सत्र बेहद ज्वलंत मुद्दे पर आधारित है. विषय है मंचीय साहित्य एंव पाठ्यक्रम साहित्य की दूरियाँ और उनके कारण. तीसरा सत्र भारत के विविध लोकगीत,कलाएं एवं उनका संवर्धन पर है. चौथा सत्र सम्मान एवं पाँचवा कवि सम्मेलन का होगा. इसके बाद चायकाल और फिर समापन होगा.
   अधिक जानकारी के लिए संस्था अध्यक्ष एवं इस कार्यक्रम की संयोजक श्रीमती अलका पाण्डेय से निम्नलिखित नम्बरों पर सम्पर्क किया जा सकता है.
सम्पर्क - ९९२०८९९२१४ /८३६९८५३०८४


सोमवार, 2 दिसंबर 2019

अग्निशिखा का अन्तर्राष्ट्रीय साहित्य महोत्सव २४/२५ दिसम्बर को मुंबई में

श्रीमती अलका पाण्डेय  [अध्यक्ष अखिल भारतीय अग्निशिखा मंच]
मुंबई,अखिल भारतीय अग्निशिखा मंच की ओर से मुम्बई में पहली बार २४/२५ दिसम्बर को मारवाड़ी फतेहपुरिया पंचायती वाडी दूसरी पान्जरापोल लेन के सी पी टैंक मुंबई -४ स्थित  दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय साहित्य महोत्सव का आयोजन संस्था अध्यक्ष श्रीमती अलका पाण्डेय के नेतृत्व में आयोजित होने जा रहा है. जिसमें देश विदेश से २०० से अधिक साहित्यकार एवं बुद्धिजीवी भाग लेंगे. इस दो दिवसीय साहित्यिक महाकुम्भ में १० अलग-अलग सत्रों में साहित्य,राजनीति एवं शिक्षा से जुड़े विषयों पर परिचर्चा एवं विमर्श होगा. जिस पर देश विदेश से आये हुए साहित्यकार एवं बुद्धिजीवी अपने- अपने विचार रखेंगे एवं उन विचारों पर चर्चा होगी. दोनों दिन के सांध्यकालीन सत्र में भव्य कवि सम्मेलन होगा. संस्था की ओर से पंजीकृत साहित्यकारों एवं अतिथियों के लिए दो दिनों के आवास एवं भोजन की भी व्यवस्था की गयी है. अधिक जानकारी के लिए संस्था अध्यक्ष एवं इस कार्यक्रम की संयोजक श्रीमती अलका पाण्डेय से निम्नलिखित नम्बरों पर सम्पर्क किया जा सकता है.
सम्पर्क - ९९२०८९९२१४ /८३६९८५३०८४

अग्निशिखा का आदिवासी बच्चों में चित्रकला प्रतियोगिता एवं अन्न वस्त्र वितरण

आदिवासियों के बीच आनन्द एवं वस्त्र दान करते हुए अलका पाण्डेय जी एवं उनके पौत्र संस्था अध्यक्ष अलका पाण्डेय जी आदिवासियों को सहयो...

विश्व रिकार्ड बना रहा अग्निशिखा का प्रथम अंतर्राष्ट्रीय साहित्य महोत्सव