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| श्रीमती अलका पाण्डेय [अध्यक्ष अखिल भारतीय अग्निशिखा मंच] |
सम्पर्क - ९९२०८९९२१४ /८३६९८५३०८४
यह ब्लॉग अखिल भारतीय अग्निशिखा मंच का है.जो कि एक सामाजिक एवं साहित्यिक संस्था है. यह सनाथा देश भर में समाज, देश एवंसाहित्य के हित में सतत काम करती रहती है. महिला हितों के लिए संस्था विशेष प्रयास करती है. इसकी मुखिया श्रीमती अलका पाण्डेय हैं. जो गत ३२ वर्षों से समाज सेवा एवं साहित्य के क्षेत्र में सक्रिय हैं. समाज सेवा के साथ वे सतत साहित्य भी रचती रहती हैं. उनके कविता और लघु कथाओं के कई संग्रह आ चुके हैं. उनसे ९९२०८९९२१४ पर सम्पर्क किया जा सकता है
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| श्रीमती अलका पाण्डेय [अध्यक्ष अखिल भारतीय अग्निशिखा मंच] |
आदिवासियों के बीच आनन्द एवं वस्त्र दान करते हुए अलका पाण्डेय जी एवं उनके पौत्र संस्था अध्यक्ष अलका पाण्डेय जी आदिवासियों को सहयो...
प्रिय अलका जी,
जवाब देंहटाएंआपको अनेकों अनेक बधाइयां, पहली तो विद्यावाचस्पति से अलंकृत होने पर, दूसरी यह विश्व स्तरीय या संभवतः विश्व में अपनी तरह का सबसे बड़ा आयोजन करने पर, तीसरा कदाचित इतनी बड़ी संख्या में भारत से और भारत के बाहर के कवियों/ साहित्यकारों का इतना बड़ा भव्य आयोजन करने पर, चौथा इतनी बड़ी संख्या में साहित्यकारों के संयुक्त प्रकाशन पर और न जाने कितनी बातें मन में आ रही है उन्हें छोड़ देने पर भी मेरी ओर से हार्दिक बधाई।
जैसा कि मैंने पहले बताया था, मैं इस समय बड़े बेटे के पास सिंगापुर में होने के कारण जनवरी के प्रथम सप्ताह से पहले लौट नहीं सकूंगा और इस कारण इस साहित्य महोत्सव में भाग नहीं ले सकूंगा। इतनी बड़ी संख्या में देश के विभिन्न हिस्सों से आए हुए साहित्यकारों से मिलना उन से चर्चाएं करना, यह सब बड़े सौभाग्य से मिलता है। कई बार लगता है कि यदि यह संभव हो पाता तो कितने ही कवियों लेखकों और रचनाकारों से परिचय का सौभाग्य प्राप्त होता। किंतु जब कोई कसक मन में रह जाती है और उसके लिए व्यक्ति हृदय से प्रयास करें तो अवश्य ही कोई ना कोई राह भी जरूर बनती है, इस बात पर मेरा अटल विश्वास है। इसलिए मैं आशा करता हूं ऐसे ही किसी और कार्यक्रम में हम फिर मिलेंगे। इस वर्ष के प्रायः अंतिम सप्ताह में होने वाला यह कार्यक्रम निश्चित रूप से अविस्मरणीय होने वाला है, मैं इस बारे में पूर्ण रूप से आश्वस्त हूं। कृपया संपूर्ण भारतवर्ष के साथ-साथ 4 अन्य देशों से पधारे सभी रचनाकारों को मेरी ओर से धन्यवाद और मेरा अविरल स्नेह कहें। यहां से लौटने के बाद संभवत: कुछ और साथियों के सहित मैं जनवरी में मुंबई लौटने पर आपसे मिलूंगा।
एक बार पुनः आपको बधाई और कार्यक्रम की सफलता हेतु आपको और सभी प्रतिभागियों को मेरी ओर से हार्दिक शुभकामनाएं।
-- राम प्रकाश विश्वकर्मा (कानपुर),
सेवानिवृत्त संयुक्त निदेशक (राजभाषा),
भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र मुंबई