सोमवार, 2 दिसंबर 2019

अग्निशिखा का अन्तर्राष्ट्रीय साहित्य महोत्सव २४/२५ दिसम्बर को मुंबई में

श्रीमती अलका पाण्डेय  [अध्यक्ष अखिल भारतीय अग्निशिखा मंच]
मुंबई,अखिल भारतीय अग्निशिखा मंच की ओर से मुम्बई में पहली बार २४/२५ दिसम्बर को मारवाड़ी फतेहपुरिया पंचायती वाडी दूसरी पान्जरापोल लेन के सी पी टैंक मुंबई -४ स्थित  दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय साहित्य महोत्सव का आयोजन संस्था अध्यक्ष श्रीमती अलका पाण्डेय के नेतृत्व में आयोजित होने जा रहा है. जिसमें देश विदेश से २०० से अधिक साहित्यकार एवं बुद्धिजीवी भाग लेंगे. इस दो दिवसीय साहित्यिक महाकुम्भ में १० अलग-अलग सत्रों में साहित्य,राजनीति एवं शिक्षा से जुड़े विषयों पर परिचर्चा एवं विमर्श होगा. जिस पर देश विदेश से आये हुए साहित्यकार एवं बुद्धिजीवी अपने- अपने विचार रखेंगे एवं उन विचारों पर चर्चा होगी. दोनों दिन के सांध्यकालीन सत्र में भव्य कवि सम्मेलन होगा. संस्था की ओर से पंजीकृत साहित्यकारों एवं अतिथियों के लिए दो दिनों के आवास एवं भोजन की भी व्यवस्था की गयी है. अधिक जानकारी के लिए संस्था अध्यक्ष एवं इस कार्यक्रम की संयोजक श्रीमती अलका पाण्डेय से निम्नलिखित नम्बरों पर सम्पर्क किया जा सकता है.
सम्पर्क - ९९२०८९९२१४ /८३६९८५३०८४

1 टिप्पणी:

  1. प्रिय अलका जी,
    आपको अनेकों अनेक बधाइयां, पहली तो विद्यावाचस्पति से अलंकृत होने पर, दूसरी यह विश्व स्तरीय या संभवतः विश्व में अपनी तरह का सबसे बड़ा आयोजन करने पर, तीसरा कदाचित इतनी बड़ी संख्या में भारत से और भारत के बाहर के कवियों/ साहित्यकारों का इतना बड़ा भव्य आयोजन करने पर, चौथा इतनी बड़ी संख्या में साहित्यकारों के संयुक्त प्रकाशन पर और न जाने कितनी बातें मन में आ रही है उन्हें छोड़ देने पर भी मेरी ओर से हार्दिक बधाई।
    जैसा कि मैंने पहले बताया था, मैं इस समय बड़े बेटे के पास सिंगापुर में होने के कारण जनवरी के प्रथम सप्ताह से पहले लौट नहीं सकूंगा और इस कारण इस साहित्य महोत्सव में भाग नहीं ले सकूंगा। इतनी बड़ी संख्या में देश के विभिन्न हिस्सों से आए हुए साहित्यकारों से मिलना उन से चर्चाएं करना, यह सब बड़े सौभाग्य से मिलता है। कई बार लगता है कि यदि यह संभव हो पाता तो कितने ही कवियों लेखकों और रचनाकारों से परिचय का सौभाग्य प्राप्त होता। किंतु जब कोई कसक मन में रह जाती है और उसके लिए व्यक्ति हृदय से प्रयास करें तो अवश्य ही कोई ना कोई राह भी जरूर बनती है, इस बात पर मेरा अटल विश्वास है। इसलिए मैं आशा करता हूं ऐसे ही किसी और कार्यक्रम में हम फिर मिलेंगे। इस वर्ष के प्रायः अंतिम सप्ताह में होने वाला यह कार्यक्रम निश्चित रूप से अविस्मरणीय होने वाला है, मैं इस बारे में पूर्ण रूप से आश्वस्त हूं। कृपया संपूर्ण भारतवर्ष के साथ-साथ 4 अन्य देशों से पधारे सभी रचनाकारों को मेरी ओर से धन्यवाद और मेरा अविरल स्नेह कहें। यहां से लौटने के बाद संभवत: कुछ और साथियों के सहित मैं जनवरी में मुंबई लौटने पर आपसे मिलूंगा।
    एक बार पुनः आपको बधाई और कार्यक्रम की सफलता हेतु आपको और सभी प्रतिभागियों को मेरी ओर से हार्दिक शुभकामनाएं।
    -- राम प्रकाश विश्वकर्मा (कानपुर),
    सेवानिवृत्त संयुक्त निदेशक (राजभाषा),
    भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र मुंबई

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